byeYearender2020: उपन्‍यास, कहानियां, कविताएं या साहित्‍य (Literature) की कोई भी विधा क्‍यों न हो. दरअसल, ये सब जिंदगी, दुनिया और समाज को करीब से जानने का माध्‍यम कही जा सकती हैं. ये अपने समय का आईना होती हैं और अपने शब्‍दों के जरिये आपको अलग ही लोक की सैर कराती हैं. सत्‍य के साथ थोड़ी कल्‍पना का यह शब्‍द सागर जितना अपने में उतारता जाता है, हम उतना ही इसमें और डूबना चाहते हैं. तो अगर आप भी हैं किताबों के शौकीन और पढ़ना चाहते हैं कुछ बेहतर तो अलविदा होते इस साल में इन खास किताबों को पढ़ने का संकल्‍प जरूर दोहराएं-

गुनाहों का देवता
गुनाहों का देवता उपन्यासकार धर्मवीर भारती का सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है. यह अपने पात्रों के चरित्र-चित्रण की दृष्टि से भी यह हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है. इसमें प्रेम के अव्यक्त और अलौकिक रूप का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है. इसमें ज्‍यादा पात्र नहीं हैं. यानी इसका ताना बाना तीन मुख्य पात्रों, जो चन्दर, सुधा और पम्मी के रूप में सामने आते हैं इनके इर्द गिर्द बुना गया है.

कितने पाकिस्तानइतिहास के फलक पर दो बड़ी घटनाएं उभरीं, जिनमें एक है ब्रिटिश हुकूमत से हिंदुस्तान का आजाद होना और दूसरा इस देश का भारत और पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट जाना. इन दोनों घटनाओं का प्रभाव कला-साहित्य-संस्कृति पर भी पूरी तरह नजर आता है. ऐसा ही एक उपन्‍यास है कितने पाकिस्तान. यह विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है. इसके लेखक कमलेश्वर हैं. वह हिंदी साहित्य जगत का जाना पहचाना नाम हैं. आपको इस बार इसे पढ़ने का संकल्‍प जरूर लेना चाहिए.

रागदरबारी
हिंदी के वरिष्ठ कथाकार श्रीलाल शुक्ल रागदरबारी जैसे कालजयी उपन्यास के रचयिता हैं. यह उपन्यास आम होते हुए भी खास है. यह राज-मजदूरों, मिस्त्रियों, ठेकेदारों और शिक्षित बेरोजगारों के जीवन पर आधारित है. यह उपन्‍यास व्यंग्य प्रधान है. इसमें ग्रामीण भारत और सरकारी तंत्र का गहराई से खाका खींचा गया है. आज भी यह बेहद लोकप्रिय है. इसे एक बार आपको जरूर पढ़ना चाहिए.

गोदान
प्रेमचन्द का उपन्‍यास गोदान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसमें ग्रामीण समाज और परिवेश का सजीव चित्रण मिलता है, जो पाठकों को बांधे रखता है. गोदान में भारतीय किसान का संपूर्ण जीवन झलकता नजर आता है. गोदान का नायक होरी एक किसान है. वह किसान वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर इसमें मौजूद है. कुल मिला कर देखा जाए तो यह भारतीय कृषक जीवन के संघर्ष को शब्‍दों में गढ़ता नजर आता है.

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मधुशाला
सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रची गयी ‘मधुशाला’ 1935 में प्रकाशित हुई थी. इसकी विशेषता यह है कि इस रचना ने आम लोगों को भी प्रभावित किया औेर उन्‍हें सरल शब्दों में कविता का गूढ़ अर्थ समझाने में कामयाब होती नजर आई. आज भी इसकी प्रसिद्धि कम नहीं हुई है. आपको एक बार इसे पढ़ कर जरूर देखना चाहिए और इसके शब्‍दों की गहराई को समझना चाहिए.

काशी का अस्सी
चर्चित कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास है काशी का अस्सी. काशी का अस्सी उपन्‍यास बनारस के अस्सीघाट और अस्सी मुहल्ले का शब्‍दों में खाका खींचता नजर आता है. यह इस समाज की इसी की जबान में बात करता दिखता है. इसमें 1990 के दशक की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को दर्शाया गया है. एक बार आपको इसे अपने कलैक्‍शन में शामिल करना चाहिए.

वैशाली की नगरवधु
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित उपन्यास वैशाली की नगरवधु हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है. यह दो भागों में हैं. इस उपन्यास में भारतीय जीवन का एक जीता-जागता चित्र अंकित है. इसकी कहानी बौद्ध काल से सम्बद्ध है और इसमें तत्कालीन लिच्छिवि संघ की राजधानी वैशाली की पुरावधु ‘आम्रपाली’ को मुख्‍य चरित्र के तौर पर दिखाया गया है.

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चित्रलेखा
उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा का ‘चित्रलेखा’ हिंदी के उन विरले उपन्यासों में शामिल है, जिनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई. इसकी कहानी पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है. इस उपन्यास पर दो बार फिल्म निर्माण भी हो चुका है. इसे आपको अपने संग्रह में जरूर शामिल करना चाहिए और इस संकल्‍प के साथ कि इसे पढ़ना है. यकीनन यह आपको बेहद पसंद आएगा.





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