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क्यों खराब या कमजोर मास्क पहनने से बेहतर है, आप मास्क पहनें ही नहीं?


ये आपको पता है कि जब आप मास्क पहनते हैं तो इससे दूसरे सुरक्षित होते हैं. लेकिन क्या आपको यह पता है कि खराब मास्क (Weak Mask) पहनने से आपकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है! जी हां, अगर आप खराब किस्म का मास्क सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए पहन रहे हैं तो, सोचिए कि आप खुद को जोखिम में डाल रहे हैं. अमेरिकी शोधपत्र फ्लूइड फिज़िक्स (Physics of Fluid) में एक स्टडी प्रकाशित हुई है जिसमें बताया गया है कि खराब क्वालिटी का या कमज़ोर किस्म का मास्क पहनने से आपको किस तरह नुकसान हो सकता है. विस्तार में आपको बताते हैं, पहले कुछ खास बातें जानिए.

– अगर आप यूज़्ड मास्क पहनते हैं तो उसकी फिल्टर करने की क्षमता कम होती है, जिससे आपको ज़्यादा खतरा हो सकता है, बजाय मास्क न पहनने के.
– मीटर के 10 लाखवें हिस्से को माइक्राॅन कहते हैं. 10 माइक्राॅन से बड़े पार्टिकलों से बचाने के लिए मास्क कारगर होना चाहए.
– इसके साथ ही मास्क पहनने से 10 माइक्राॅन से छोटे पार्टिकलों से भी मुंह और फेफड़ों की सुरक्षा होती है.ये भी पढ़ें :- क्या भारत में फरवरी में खत्म हो जाएगा कोरोना, अगर हां तो क्यों?

मास्क न पहनने से खतरनाक है यूज़्ड मास्क
तीन लेयरों वाले सर्जिकल मास्क पहनने से होने वाले असर के बारे में किए गए अध्ययन में सूक्ष्म पार्टिकलों के फिल्टर की प्रक्रिया को देखा गया. पाया गया कि एक नए सर्जिकल मास्क की क्षमता 65 फीसदी तक होती है जबकि बार-बार इस्तेमाल करने पर इसकी क्षमता घटकर 25 फीसदी ही रह जाती है. इस स्टडी में यह भी बताया गया कि मास्क पहनने और न पहनने से किस तरह चेहरे के आसपास का एयरफ्लो अलग अलग तरह से होता है.

मास्क न पहनने की सूरत में मुंह और नाक में हवा सीधे प्रवेश करती है, लेकिन मास्क पहनने से हवा के प्रवेश करने की रफ्तार धीमी हो जाती है. इससे हवा में सूक्ष्म पार्टिकल और ड्राॅपलेट मास्क की सत्ह पर बिखर जाते हैं. यह निश्तिच रूप से आपकी सेहत के लिए बेहतर होता है.

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इस प्रोसेस में मास्क की फिल्टर क्षमता खास बात होती है. अब जानिए कि स्टडी में किस तरह इस बात को समझाया गया कि खराब मास्क पहनने से क्या असर होता है.

न्यूज़18 क्रिएटिव

अगर मास्क पुराना है या उसकी फिल्टर क्षमता कम हो चुकी है तो आपको किसी किस्म की सुरक्षा नहीं मिलती. 2 या 3 बार इस्तेमाल करने के बाद अगर सर्जिकल मास्क की क्षमता 30 फीसदी से कम हो जाए तो आपकी सांस में ज़्यादा एयरोसाॅल जा सकते हैं, जो मास्क न पहनने की सूरत में आपके शरीर में कम प्रवेश करते हैं. यानी इस तरह के मास्क पहनने से अच्छा है कि आप मास्क न ही पहनें.

नाक और फेफड़ों में पार्टिकल
स्टडी में कहा गया है कि हमारी नाक अपने आप ही एक तरह के फिल्टर जैसा काम करती है. बड़े पार्टिकल नाक के आसपास ही जमा हो जाते हैं और सूक्ष्म पार्टिकल ही फेफड़ों तक पहुंचते हैं. जब आप अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाते हैं तो मास्क बड़े पार्टिकलों को रोक लेता है. इससे होता यह है कि नाक का कुदरती फिल्टर कुछ सूक्ष्म पार्टिकलों को रोकने का काम भी कर पाता है. इससे फेफड़ों की सुरक्षा नुकसानदायक सूक्ष्म पार्टिकलों से भी हो जाती है.

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मास्क में लेयर्स और फोल्ड्स यानी चुन्नट होने से फायदा यह होता है कि ज़्यादा सघन पार्टिकल इन्हीें में डिपाॅज़िट हो जाते हैं. इस स्टडी के तमाम ब्योरों का सार यही है कि अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो साफ सुथरा और अच्छी क्वालिटी का पहनें. बार बार यूज़ किया हुआ या कम क्ष्ज्ञमता का मास्क पहनने से आपके फेफड़ों को खतरा हो सकता है. यह एक गलतफहमी ही है कि किसी भी तरह का मास्क कैसे भी पहन लेने से सुरक्षा हो जाती है.





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