“हमारा पूरा जीवन नर्क और दुःखो के बीच बीतता है।

नर्क के खत्म होते ही दुःख शुरू हो जाते है और दुःख खत्म होते-होते नर्क का समय शुरू हो जाता है।”
सुख जैसा कुछ भी किसी के जीवन मे होता ही नही है।

आप मुझसे सहमत हो या ना हो लेकिन गंभीरता से सोचे तो हकीकत यही है।
हम अपना पूरा जीवन सुख की तलाश में बिता देते है लेकिन सुख होता तो ही तो कही मिलता।
वास्तव में दुःख और नर्क के बीच ही वह होता है जिसकी हर किसी को तलाश होती है।

बहुत गंभीर विषय है यह, इसे हल्के में लेकर कोई राय मत बनाइये इसे सोचिये और उस बीच के पलों में जीवन को जीने का प्रयास करिये।

Vinod Kashyap @admin

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