शहरयार की शायरी (Shahryar Shayari): उर्दू के मशहूर शायर (Shayar) ‘शहरयार’ किसी परिचय के मोहताज नहीं है. शहरयार का असल नाम कुंवर अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान (Akhlaq Mohammed Khan) था, मगर शेरो-सुख़न की दुनिया में ‘शहरयार’ (Shahryar) के नाम से जाने जाते हैं. उन्‍होंने फिल्‍मों के लिए भी गीत लिखे. ‘उमराव जान’ की मशहूर ग़ज़ल (Ghazal) आज भी लोगों की ज़बान पर हैं. उन्‍हें ज्ञान पीठ और साहित्य अकादमी सहित कई अहम सम्मानों से नवाज़ा गया. उनकी अहम किताबों में ख़्वाब का दर बंद है, शाम होने वाली है, मिलता रहूंगा ख़्वाब में आदि शामिल हैं. आज हम ‘कविताकोश’ के साभार से हाजि़र हुए हैं ‘शहरयार’ का मुहब्‍बत भरी शायरी लेकर, तो पढ़िए और लुत्‍फ़ उठाइए…

1. कटेगा देखिए दिन जाने किस अज़ाब के साथ
कि आज धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ

तो फिर बताओ समंदर सदा को क्यूँ सुनतेहमारी प्यास का रिश्ता था जब सराब के साथ

बड़ी अजीब महक साथ ले के आई है
नसीम, रात बसर की किसी गुलाब के साथ

फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं
गुज़रने वाले हैं कुछ लोग याँ से ख़्वाब के साथ

ज़मीन तेरी कशिश खींचती रही हमको
गए ज़रूर थे कुछ दूर माहताब के साथ.

2. ज़िंदगी जैसी तवक्को थी नहीं, कुछ कम है
हर घडी होता है अहसास कहीं कुछ कम है

घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक्शे के मुताबिक़ यह ज़मीन कुछ कम है

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी
दिल में उम्मीद तो काफी है, यकीन कुछ कम है

अब जिधर देखिए लगता है कि इस दुनिया में
कहीं कुछ ज़्यादा है, कहीं कुछ कम है

आज भी है तेरी दूरी ही उदासी का सबब
यह अलग बात कि पहली सी नहीं कुछ कम है.

3. ऐसे हिज्र के मौसम अब कब आते हैं
तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं

जज़्ब करे क्यों रेत हमारे अश्कों को
तेरा दामन तर करने अब आते हैं

अब वो सफ़र की ताब नहीं बाक़ी वरना
हम को बुलावे दश्त से जब-तब आते हैं

जागती आँखों से भी देखो दुनिया को
ख़्वाबों का क्या है वो हर शब आते हैं

काग़ज़ की कश्ती में दरिया पार किया
देखो हम को क्या-क्या करतब आते हैं.





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