सीखें योग एक्सपर्ट सविता यादव से

सीखें योग एक्सपर्ट सविता यादव से

शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए भी योगासन अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा घंटो बैठकर काम करने वाले लोगों को अक्सर कमर और पीठ दर्द (Back Pain) की परेशानी होती है. योग एक्सपर्ट सविता यादव ने आज कुछ योग आसान बताए जिन्हें नियमित दिनचर्या में शामिल कर आप हेल्दी रह सकते हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 21, 2020, 10:55 AM IST

सर्दियां बढ़ चुकी हैं और कोरोना वायरस भी अभी पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो सका है. ऐसे में इम्‍यून सिस्‍टम (Immune System) को मजबूत रखना बहुत जरूरी है. ताकि किसी भी तरह के इंफेक्‍शन (Infection) से बचा जा सके. इसके लिए बहुत जरूरी है कि योगासन (Yoga Posture) को अपने रूटीन में शामिल किया जाए. शरीर को स्वस्थ (Healthy) रखने के लिए जरूरी है कि पाचन तंत्र (Digestive System) दुरुस्‍त रहे. वहीं शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए भी योगासन अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा घंटो बैठकर काम करने वाले लोगों को अक्सर कमर और पीठ दर्द (Back Pain) की परेशानी होती है. वहीं बैठकर काम करने से पेट की चर्बी भी तेजी से बढ़ती है. योग एक्सपर्ट सविता यादव ने आज कुछ योग आसान बताए जिन्हें नियमित दिनचर्या में शामिल कर आप हेल्दी रह सकते हैं.

भस्त्रिका: सबसे पहले ध्यान या वायु मुद्रा में बैठकर भस्त्रिका व्यायाम करें. यह मुख्य रूप से डीप ब्रीदिंग है. करीब पांच मिनट तक रोजाना डीप ब्रीदिंग करें, इससे आपका रेस्पिरेटरी सिस्टम मजबूत हो जाएगा.

कपालभारती प्राणायाम:
कपालभारती : कपालभारती प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं.

भ्रामरी प्राणायाम
यह प्राणायाम सुबह और शाम दोनों ही वक्त कर सकते हैं. प्राणायाम को करते वक्त ध्यान रहे कि आसपास का वातावरण शांत हो.

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका
– भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं. इसके बाद दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर कानों तक ले जाएं और अंगूठे के सहारे से कानों को बंद कर लें.

– कानों को बंद करने के बाद हाथों की तर्जनी उंगली और मध्यमा, कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर ऐसे रखें जिससे पूरा चेहरा कवर हो जाए. इसके बाद मुंह को बंद करके नाक से हल्की-हल्की सांस को अंदर और बाहर छोड़े.
– 15 सेकेंड तक ये आसान करने के बाद वापस से नॉर्मल स्थिति में आ जाएं. इस प्राणयाम को 10 से 20 बार दोहराएं. आप चाहे तो शुरुआत में इसे 5 से 10 भी कर सकती हैं.

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अनुलोम विलोम प्राणायाम: सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
-फेफड़े मजबूत होते हैं
-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
-वजन कम करने में मददगार
-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
-गठिया के लिए भी फायदेमंद.





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