साइंसः हमें छींक क्यों आती है, इसकी गति जानकर हैरान रह जाएंगे

छींकना एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे शरीर का रिफलैक्स एक्शन भी कह सकते हैं

आजकल हमारी हर छींक (Sneeze) पर तुरंत सवाल उठ जाते हैं. हालांकि हमेशा छींक आ रही हो तो तुरंत लोगों के बीच से हट जाएं लेकिन 90 फीसदी मामलों में छींक बहुत सामान्य प्रक्रिया है, ये कब और क्यों आती है, ये तो जानिए ही साथ ही ये जानिए कि इसकी गति कार, बस और ट्रेन से भी ज्यादा होती है

आजकल हमें जैसे ही छींक (Sneeze) आती है. हम डर जाते हैं. हमें लगने लगता है कि कहीं हम कोरोना वायरस (Corona Virus) का शिकार तो नहीं हो गए. अगर हम दूसरों के सामने इस दौरान गलती से भी छींक दें तो उनकी निगाहें सवालिया तरीके से उठ जाती हैं. ये पक्की बात है कि हर छींक पर ना तो घबराने की जरूरत है ना ही इसे किसी बीमारी से जोड़ने की जरूरत है.

किसी जमाने में छींक को शुभ या अशुभ से भी जोड़ दिया जाता था. जैसे ही कोई घर से बाहर निकल रहा हो या कोई नया काम शुरू करने जा रहा हो और छींक दे तो इसे अशुभ माना जाता है. लेकिन पीठ के पीछे छींक को शुभ माना जाता है.

छींक को लेकर बड़े अंधविश्वास भी रहे हैं

दाईं ओर छींक को शुभ माना जाता है तो बाईं ओर छींक को अशुभ माना जाता रहा है-हालांकि इन बातों का कोई आधार नहीं है. दरअसल छींक को लेकर बहुत तरह से अंधविश्वास प्र्चलित रहे हैं.छींक का भी एक साइंस है

आधार केवल एक ही बात का है कि जिस तरह हर बात साइंस की कसौटी पर कसी जाती है. उसी तरह छींक का भी एक साइंस है.साइंस के अनुसार छींक आना महज शरीर का एक रिफलैक्स एक्शन है, जिस पर हमारा कोई जोर नहीं.

तब तुरंत आती है छींक 

नाक के अंदर एक म्यूकस झिल्ली होती है दूसरे शब्दों में समझें तो नाक के अंदर एक मेंम्बरेन होती है. जब इस झिल्ली की नर्व्स में सूजन आती है तो उसमें खुजलाहट होने लगती है. इसी वजह से छींक आती है.छींक में नाक और मुंह से हवा तेजी के साथ निकलती है. वैसे तो नर्व्स में सूजन जुकाम के कारण आती है.

इन वजहों से भी होता है ऐसा 
कभी-कभी कोई पदार्थ जब नाक के अंदर चला जाता है तो नर्व्स असहजता महसूस करती है. तब इस पदार्थ को बाहर निकालने के लिए छींक आती है. कई बार एलर्जी के कारण छींक आती है. कई बार फ्यूम्स और धूल अंदर जाने पर छींक आती है. कभी-कभी तेज प्रकाश से आंख के रेटिना से मस्तिष्क को जाने वाली ऑप्टिक नर्व्स या नाड़ी भी उत्तेजित हो जाती है, जिससे छींक आती है.

तब इस गति से बाहर निकलती है छींक 

छींक आना शरीर की एक ऐसी क्रिया है, जिसमें हवा के झटके के साथ शरीर उन पदार्थों को बाहर निकालने का प्रयास करता है, जो म्यूकस झिल्ली के लिए दिक्कत पैदा करती है. छींक आने पर पूरे शरीर को झटका लगता है. कई बार जब हम छींकते तो मुंह और नाक से जो हवा बाहर निकलती है, उसका वेग 160 किलोमीटर प्रति घंटे का होता है.

तब इसे गंभीर मानें

छींक आते समय शरीर में कंपन होता है. आंखें बंद हो जाती हैं. छींक के बाद हम अक्सर ताजगी महसूस करते हैं. सिर में हल्कापन लगने लगता है. लेकिन कई बार जब वायरस या फ्लू से पीड़ित होते हैं तो भी छींक आती है. हालांकि तब छींक के साथ शरीर कई और संकेत देता है, जिससे पता लग जाता है कि ये छींक साधारण नहीं है बल्कि गंभीर है.

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First published: May 8, 2020, 9:08 PM IST





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