नई दिल्ली. एअर इंडिया (Air India Stake Sale) का लोगो लाल रंग का उड़ता हुआ हंस है. इसमें नारंगी में कोणार्क चक्र भी है. कंपनी के हवाई जहाजों के पिछले हिस्से पर प्रमुखता के साथ लोगो को जगह दी जाती है. कंपनी का शुभंकर ‘महाराजा’ पहली बार 1946 में दिखा था. यह एयरलाइन की खास पहचान रहा है. एअर इंडिया एक्सप्रेस और एअर इंडिया सिंगापुर टर्मिनल सर्विस लिमिटेड को छोड़कर (इन दोनों कंपनियों में एअर इंडिया की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है) अन्य इकाइयों के ब्रैंड्स को भी एअर इंडिया के नए ग्राहक को ऑफर किया जाएगा.

एअर इंडिया को बेचने और नए निवेशक के आने के बाद इन सब-ब्रैंड्स के लिए मास्टर ब्रैंड और लोगो का इस्तेमाल करना संभव नहीं रह जाएगा. एअर इंडिया के पास करीब 12 सब-ब्रैंड्स हैं. उन्हें मास्टर ब्रैंड और लोगो से अलग करने पर गौर किया जा रहा है.’ सरकार इसी साल एअर इंडिया को बेचने की कोशिश कर रही है. नए खरीदार के लिए कंपनी को आकर्षक बनाने की खातिर सारे उपाय भी किए जा रहे हैं.

आइए जानें एअर इंडिया की शुरुआत कैसे हुई….

ऐसे हुई एअर इंडिया की शुरुआत-

अप्रैल 1932 में एअर इंडिया का जन्म हुआ था. उस समय के उद्योगपति जेआरडी टाटा ने इसकी स्थापना की थी, मगर इसका नाम एअर इंडिया नहीं था. तब इसका नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था. टाटा एयरलाइंस की शुरुआत यूं तो साल 1932 में हुई थी, मगर जेआरडी टाटा ने वर्ष 1919 में ही पहली बार हवाई जहाज तब शौकिया तौर पर उड़ाया था जब वो सिर्फ 15 साल के थे.
पहली उड़ान में सवारियां नहीं चिट्ठी थी

(1) जेआरडी टाटा ने बाद में अपना पायलट का लाइसेंस लिया. मगर पहली व्यावसायिक उड़ान उन्होंने 15 अक्टूबर को भरी जब वो सिंगल इंजन वाले ‘हैवीलैंड पस मोथ’ हवाई जहाज़ को अहमदाबाद से होते हुए कराची से मुंबई ले गए थे.

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इस उड़ान में सवारियां नहीं थीं बल्कि 25 किलो चिट्ठियां थीं. यह चिट्ठियां लंदन से ‘इम्पीरियल एयरवेज’ द्वारा कराची लाई गईं थीं. इम्पीरियल एयरवेज ब्रिटेन का राजसी विमान वाहक हुआ करता था.

(2) टाटा एयरलाइंस के लिए साल 1933 पहला व्यावसायिक वर्ष रहा. टाटा संस की दो लाख की लागत से स्थापित कंपनी ने इसी वर्ष 155 पैसेंजरों और लगभग 11 टन डाक भी ढोई. टाटा एयरलाइन्स के जहाजों ने एक ही साल में कुल मिलाकर 160, 000 मील तक की उड़ान भरी.

हर चिट्ठी पर मिलते थे चार आने: नियमित रूप से डाक लाने ले-जाने का सिलसिला शुरू हुआ. मगर भारत में तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने टाटा एयरलाइंस को कोई आर्थिक मदद नहीं दी थी. सिर्फ हर चिट्ठी पर चार आने दिए. उसके लिए भी डाक टिकट चिपकाना था.

(3) शुरुआती दौर में टाटा एयरलाइंस मुंबई के जुहू के पास एक मिट्टी के मकान से संचालित होता रहा. वहीं मौजूद एक मैदान ‘रनवे’ के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा. जब भी बरसात होती या मानसून आता तो इस मैदान में पानी भर जाया करता था.

उस वक्त टाटा एयरलाइंस के पास दो छोटे सिंगल इंजन वाले हवाई जहाज, दो पायलट और तीन मैकेनिक हुआ करते थे. पानी भर जाने की सूरत में जेआरडी टाटा अपने हवाई जहाज पूने से संचालित करते थे.

(4) पहले पायलाट थे अंग्रेज: ब्रितानी शाही रॉयल एयर फोर्स’ के पायलट होमी भरूचा टाटा एयरलाइंस के पहले पायलट थे, जबकि जेआरडी टाटा और और विंसेंट दूसरे और तीसरे पायलट थे.

(5) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब विमान सेवाओं को बहाल किया गया, तब 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन गयी और उसका नाम बदलकर ‘एअर इंडिया लिमिटेड’ रखा गया.आजादी के बाद यानी साल 1947 में भारत सरकार ने एअर इंडिया में 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी ले ली थी.

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