• अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस में काम करने वाले अधिकारियों को बयान देने से रोका गया
  • आंतरिक रिपोर्ट में दावा- ट्रम्प प्रशासन संक्रमण और मौतों का अनुमान कम बता रहा

दैनिक भास्कर

May 06, 2020, 06:01 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका के लिए जून महीने में कोरोना संकट भयावह रूप ले सकता है। ट्रम्प प्रशासन की एक आतंरिक रिपोर्ट की मानें तो जून में अमेरिका में संक्रमण के रोजाना 2 लाख नए मामले सामने आएंगे और 3000 मौतें होंगी। ट्रम्प प्रशासन ने अब व्हाइट हाउस के अधिकारियों को बिना अनुमति कांग्रेस में बयान देने से भी रोक दिया है।

व्हाइट हाउस की कोरोना वायरस टास्क फोर्स के अधिकारियों को कहा गया है कि वे प्रेस और कांग्रेस को चीफ मार्क मिडो की अनुमति के बिना कोई बयान नहीं देंगे। इस आदेश से जुड़ा ई-मेल न्यूयार्क टाइम्स के पास है। स्टेट, हेल्थ, ह्यूमन सर्विसेज के अलावा होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अफसरों को भी सामने आने से रोक दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया- संक्रमण से मौतों में 70% का इजाफा हो सकता है

आतंरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी अमेरिका में संक्रमण से रोजाना होने वाली मौत की संख्या 1750 है, यह 70% तक बढ़ सकती है। संक्रमण के रोजाना आ रहे नए मामले 25000 से बढ़कर 2 लाख तक हो जाएंगे। यह अनुमान फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के बनाए पब्लिक मॉडल के आधार पर जताया गया है।

माना जा रहा है कि संक्रमण के आंकड़ों को जानबूझकर इसलिए कम बताया जा रहा है, क्योंकि बीते 7 हफ्तों से सभी राज्य बंद हैं और इसका असर सीधे तौर पर अमेरिका की इकोनॉमी पर पड़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं कि अगर सभी राज्य फिर से खोले जाते हैं, तो नतीजे भयावह होंगे।
4 अगस्त तक मौतों की संख्या बढ़ेगी: इंस्टीट्यूट
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स ने भी कहा है कि अगस्त की शुरुआत तक अमेरिका में संक्रमण से 1.35 लाख मौतें होंगी। इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा है कि 11 मई तक अमेरिका के 31 राज्यों में लोगों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग को नकारने के चलते संक्रमण बढ़ेगा। 

दुनिया के एक तिहाई मरीज सिर्फ अमेरिका में
दुनिया भर में मंगलवार को 50 हजार से ज्यादा नए कोरोना मरीज मिले। इनमें से 23% अमेरिका में सामने आए। वहीं दुनिया में हुई मौतों की 28% अमेरिका में हुई हैं। मंगलवार को 11489 नए मरीज सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या 12.24 लाख के पार हो गई है। यह दुनिया के कुल मरीजों का एक तिहाई है।



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