नई दिल्ली: दनादन रिफंड मिल रहे हैं. वित्त मंत्रालय के विभाग CBDT, CBIC दोनों काम पर हैं, ऐसे जैसे कोई वसूली से ज्यादा फोकस रिफंड देने पर है. पूछने पर एक अधिकारी से पता लगा कि ये वक्त कोरोना का है इसलिए टैक्स वसूली वाला काम अपनी जगह है पर इसके लिए किसी पर दबाव नहीं बनाया जा रहा, फोकस इस बात पर पर है कि जिन कंपनियों से अक्सर टैक्स लेते हैं, उन कंपनियों, कारोबारियों, MSME को मानवीय आधार पर यथासंभव राहत दी जाए.

ये ऐसा समय है जब कोरोना की वजह से कारोबार सिमटने का डर है और इससे बहुत से लोगों के रोजगार पर संकट आ सकता है. हमारी तरफ से जो हम कर सकते हैं वो तो हम करें, इनको रिफंड भी तुरंत दिया जाए ताकि ये अपना काम जारी रखें. हाथ में पैसा दिखेगा तो काम जारी रखने में मदद मिलेगी और ये लोगों को नौकरी से निकालने जैसे‌ फैसले लेने से हिचकेंगे.

जरा गौर कीजिए CBDT ने अप्रैल में 10 दिन के अंदर 5204 करोड़ रुपए बांट दिए, 8.2 लाख MSME प्रोपेराइटर, फर्म, कॉरपोरेट, ट्रस्ट को रिफंड बांटे. कुल 14 लाख रिफंड में 5 लाख करोड़ रुपए दे दिए गए. रिफंड यहीं रुक नहीं रहा है और रिफंड बंटना है, 7760 करोड़ रुपए अगले कुछ दिनों में बांटे जाने वाले हैं. इसके लिए विभाग से संपर्क करने के लिए कहा है ताकि रिफंड मिलने में आ रही दिक्कत दूर की जाए.

उधर, CBIC ने बीस दिन में GST से संबंधित 12923 केस में 5575 रिफंड बांट दिए.

एक्सपोर्टर को पुराने रिफंड के केस को नए के साथ मिलाकर बंच बनाने की सुविधा दी जा रही है. हालांकि यहां एक धोखे का डर जरूर है कि कोई गलत तरह से इनपुट टैक्स क्रेडिट न ले ले. इसलिए सबसे ज्यादा समय वेरीफाई करने में लगाया जा रहा है, जो भी हो देखकर अच्छा लग रहा है कि लोगों के पास पैसे भेजने का प्रबंध करने का सोचा जा रहा है.

सबसे बड़ी चिंता MSME की है, देश में 6.33 करोड़ MSME हैं. ये 12 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं. इनका कारोबार और इनमें काम कर रहे लोगों का रोजगार बचाना है. इनके पास नकदी पहुंचाना जरूरी है. लिहाजा हर संभव कोशिश होनी ही चाहिए.





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