• सैंटा को न तो ईमेल पसंद है और न ही मोबाइल फोन, वे सिर्फ बच्चों की चिट्ठियों का जवाब देते हैं
  • कोई भी बच्चा सिर्फ Tähtikuja 1, 96930 Rovaniemi, Finland लिखकर सैंटा को चिट्‌ठी भेज सकता है
  • हर साल सैंटा के नाम दुनिया के 200 देशों के बच्चों की पांच लाख चिटि्ठयां फिनलैंड पहुंचती हैं

अंकित गुप्ता

अंकित गुप्ता

Dec 25, 2019, 01:52 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. क्रिसमस के मौके पर सैंटा क्लॉज के आने का इंतजार दुनिया आज भी करती है। ज्ञात इतिहास के हवाले से आज अगर सैंटा होते तो उनकी उम्र 1749 वर्ष की होती। सैंटा आज भले ही न हो, लेकिन उनका गांव जरूर है। इसे दुनिया में आधिकारिक रूप से सैंटा क्लॉज विलेज का दर्जा मिला हुआ है। यह गांव है सुदूर यूरोप में बर्फ से ढंके आर्कटिक सर्कल में फिनलैंड के लैपलैंड इलाके में स्थित सैंटा क्लॉज विलेज ‘रोवानिएमी’।

सैंटा क्लॉज की ऑफिस प्रतिनिधि वीरा ने भास्कर को ईमेल पर इस साल सैंटा के गांव में क्रिसमस की रौनक के बारे में जानकारी दी है। वीरा ने बताया कि हर बार की तरह 2019 के क्रिसमस पर बेहद रौनक है और दुनियाभर से लोग सैंटा से मिलने पहुंच रहे हैं। हालांकि 22 दिसंबर के बाद सैंटा बहुत कम लोगों से मिल रहे हैं क्योंकि 23 तारीख से ‘सैंटा इज ऑन हिज वे’ इवेंट शुरू हो गया है। इसमें हजारों लोग उस पल के गवाह बनते हैं जब सैंटा क्लॉज रेनडियर वाली अपनी स्लेज से दुनिया का चक्कर लगाने की अपनी यात्रा आरंभ करते हैं।

इस बार क्रिसमस पर सैंटा के घर को विशेष रूप से सजाया गया है। कैरल्स गाई जा रही हैं और यहां के तमाम क्रिसमस ट्री पर रोशनी की गई है। सैंटा के सहायक दुनियाभर के बच्चों को तोहफे भेजने में बहुत व्यस्त हैं। जब भास्कर की टीम ने सैंटा से बात करने की कोशिश की तो जवाब मिला कि क्रिसमस से एक महीने पहले संपर्क कीजिए, क्योंकि सैंटा और उनके स्टॉफ के लिए बच्चों की खुशी सबसे बड़ी है।
 

गांव में सैंटा का ऑफिस और स्टाफ दोनों

फिनिश दंतकथाओं में माना जाता है कि 270 ईसवी में सैंटा यहीं-कहीं जन्मे थे। इस गांव में सैंटा क्लॉज जैसा सैंटा रहता है। अब यह गांव जगह दुनिया के ट्रैवल मैप पर खास मुकाम रखता है। सैंटा का यहां एक ऑफिस और स्टॉफ है और इसकी आधिकारिक साइट भी है। सैंटा पूरे साल बच्चों की चिट्ठियों का जवाब देते हैं और उन्हें तोहफे भी भेजते हैं। मजेदार बात यह है कि सैंटा सिर्फ डाक से पहुंची चिटि्ठयों का ही जवाब देते हैं। पूरे साल के दौरान सैंटा को अपने मेन पोस्ट ऑफिस में दुनिया के 200 देशों से 5 लाख से ज्यादा चिटि्ठयां मिलती है और ज्यादातर का जवाब भी देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक सैंटा को बीते सालों में करीब 2 करोड़ चिटि्ठयां मिल चुकी हैं। 

ऐसा है फिनलैंड में सैंटा का गांव

फिनलैंड का रोवानिएमी में माइनस 5 डिग्री तापमान होता है और सैंटा का घर पूरे साल बर्फ से ढंका रहता है। गांव में लकड़ी की बनी कई झोपड़ियां हैं, इनमें से एक में सफेद लंबी दाढ़ी वाले आज के सैंटा पूरे साल उसी लाल पोशाक और टोपी लगाए रहते हैं जो हमारे यहां सिर्फ क्रिसमस के पहले नजर आती है। इसी घर को आधुनिक सैंटा का ऑफिस भी कहते हैं, और यहां वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। यहां जब सैंटा घर से बाहर निकलते हैं तो आने वाले लोगों और खासतौर पर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं। 

रोवानिएमी पहुंचने वाले लोग इस सैंटा से मुलाकात किए बगैर नहीं लौटते। वह उनसे बातें कर सकते हैं और यादगार के लिए तस्वीर भी खिंचा सकते हैं। जिसे सिर्फ यहां के कर्मचारी ही खींच सकते हैं। घर में जाने का कोई चार्ज नहीं है लेकिन सैंटा के साथ एक यादगार तस्वीर के लिए कुछ यूरो चुकाने पड़ते हैं। 

रोवानिएमी में सैंटा के घर में घुसते ही हर तरफ नजर आती है बच्चों की सैंटा के नाम लिखीं चिट्ठियां और भेजे गए तोहफे। सैंटा का दर्जनभर साथियों का स्टॉफ इन्हें बहुत संभालकर रखता है। दुनियाभर के लोग, खासतौर पर बच्चे पूरे साल सैंटा को चिट्ठियां भेजते हैं और सैंटा के पास सिर्फ दो ही काम होते हैं। पहला, दुनियाभर से आए खतों का जवाब भेजना और दूसरा, बच्चों के खिलौने वाली की वर्कशॉप की देखरेख करना। 

इस वर्कशॉप में एल्फ्स नाम के बौने कर्मचारी बच्चों के लिए खिलौने बनाते हैं। एल्फ्स शब्द का इस्तेमाल प्राचीन कथाओं में बौने लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इन वर्कशॉप में सालभर खिलौने बनाए जाते हैं जो क्रिसमस पर दुनियाभर के बच्चों को बतौर गिफ्ट भेजे जाते हैं। सैंटा को चिट्ठियां भेजने वाले और उनसे तोहफा मांगने वाले बच्चों की मांग पर खासतौर पर ध्यान दिया जाता है। लोग सैंटा को अपनी विशलिस्ट भी भेजते हैं और एक ऐसी ही सबसे लम्बी लिस्ट को 2012 में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली थी जिसमें 75954 विशेज भेजी गईं थीं।

सबसे लम्बी विश लिस्ट को पढ़ते सैंटा और उनका गिनीज बुक सर्टिफिकेट।

क्रिसमस पर इस गांव का एक और हिस्सा बेहद खास नजर आता है। इसे सैंटा आइस पार्क के नाम से जाना जाता है। यह सैंटा ऑफिस से कुछ ही दूरी पर है लेकिन यहां घूमने के लिए फीस देनी पड़ती है। एक बार एंट्री फीस देने के बाद एक दिन में कई बार आ-जा सकते हैं। पार्क के एक हिस्से में बर्फ के झूले हैं और दूसरे में आइस हाउस। जहां लोग आराम करते हैं। पार्क के दूसरे हिस्से में आग सेंकने का इंतजाम भी किया गया है ताकि आप यहां की ठंड को बर्दाश्त कर सकें। 

पूरे गांव की खूबसूरती देखना है तो रेनडियर स्लेजराइड की सवारी करनी होगी। गांव के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां ठंड बहुत ज्यादा रहती है, यहां जाने वाले लोगों को चाय मुफ्त में दी जाती है। रेनडियर स्लेजराइड एक खास तरह के जोन में की जाती है जहां लगभग सभी लोग सैंटा के गांव में पहनी जाने वाले ट्रेडिशनल ड्रेस में नजर आते हैं। राइड के लिए पर्यटकों को कुछ कीमत चुकानी पड़ती है। 

रेनडियर स्लेजराइड की सैर करता सैंटा क्लॉज।

सबसे पहले फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी पहुंचना होगा। यहां से फ्लाइट  के जरिए रोवानिएमी सिटी पहुंच सकते हैं। रोवानिएमी से लैपलैंड तक का 8 किलोमीटर का सफर सैंटा एक्सप्रेस से तय कर सकते हैं। जो हर घंटे उपलब्ध रहती है। आप चाहें तो टैक्सी भी ले सकते हैं। 

परियों के शहर जैसे दिखने वाले लेपलैंड में हर साल आइस होटल भी सैंटा के गांव में ही है। यह दुनिया का पहला बर्फ से बना ऐसा होटल है जो हर साल बनता है। यह फिनलैंड के खास टूरिस्ट प्लेसेस में से एक है। इसकी शुरुआत दिसम्बर से होती है और पर्यटक अप्रैल तक यहां आ सकते हैं। इसमें रूम से लेकर बार और चर्च तक सब कुछ बर्फ का है। यहां की खूबसूरती और यादें आसानी जेहन से आसानी से नहीं निकलतीं। इसे पहली बार 1990 में तैयार किया गया था जिसका तापमान अक्सर माइनस 5 डिग्री रहता है।

सैंटा के गांव के पास आर्कटिक स्नो होटल और ग्लास इगलू में बर्फ के बेड पर सोते लोग।

सैंटा न तो ईमेल का इस्तेमाल करता है और न ही किसी के मोबाइल कॉल का जवाब देता है। सैंटा सिर्फ उन्हीं से मिलता है जो सीधे उसके ऑफिस पहुंच चुके हैं। जो लोग सैंटा को लेटर या ग्रीटिंग भेजना चाहते हैं या कोई ऐसी इच्छा जो चाहते हैं सैंटा पूरी करे तो दिए गए पते पर भेज सकते हैं। 
पता है-
सैंटा क्लॉज,  Tähtikuja 1, 96930 Rovaniemi, Finland

 



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