नई दिल्ली: रामचरित मानस में कहा गया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों को फैसला लेते समय, व्यक्तिगत नहीं, बल्कि नीतिगत बातों का ख्याल रखना चाहिए. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है. आज योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का 89 वर्ष की उम्र में दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया, लेकिन ना तो वो अपने पिता के अंतिम दर्शन के लिए जा पाए और ना ही कल अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने हरिद्वार जाएंगे. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी मां को एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि वो पिता के दर्शन करना चाहते थे लेकिन कोरोना को हराने के लिए जनता के हित में ऐसा नहीं कर पाएंगे. उन्होंने लिखा है कि 21 अप्रैल को होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता के कारण भाग नहीं ले पाएंगे.

योगी आदित्यनाथ ने अपनी मां और परिवार के सदस्यों से अपील की है कि अंतिम संस्कार में कम से कम लोग शामिल हों. पिता की मृत्यु हो गई, लेकिन पुत्र का कहना है कि वो अपनी ड्यूटी छोड़कर नहीं जाएगा. सत्ता या राजनीति से जुड़ा कोई और नेता होता तो शायद लॉकडाउन के दौरान खुद अपने नियम तय करता.

बड़े रसूख वाला कोई और बेटा होता तो शायद पिता के अंतिम संस्कार को बड़े आयोजन में तब्दील कर देता, सीधा प्रसारण होता, हजारों लोगों को इकट्ठा किया जाता. लेकिन योगी आदित्यनाथ ने यहां पुत्र-धर्म को महत्व नहीं दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री होने के नाते अपने राज-धर्म को महत्व दिया. 

आज योगी आदित्यनाथ से उन लोगों को सीखना चाहिए, जिन्होंने रस्म-रिवाज़ के नाम पर लॉकडाउन के नियमों को बड़ी बेशर्मी से तोड़ दिया. कुछ दिनों पहले कर्नाटक के विधायक एम जयराम ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने जन्मदिन का जश्न मनाया था. उनके बुलाने पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और सबने मिलकर Social Distancing का मजाक बना दिया था. 

इसी तरह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बेटे की शादी में भी लॉकडाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं. ये सारा कुछ इसलिए क्योंकि शादी के रस्म को सामाजिक सुरक्षा के नियमों से ज्यादा महत्व दिया गया. समाज के तथा-कथित ताकतवर लोगों को लगता है कि वो अपने पैसे, अपने पावर और अपनी पहुंच से खुद के लिए अलग कायदे और कानून बना सकते हैं. लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे लोगों को ये बता दिया है कि ऊंचे लोग वो होते हैं, जो देश-हित में देश की भलाई के कानून को सबसे ऊपर रखते हैं. 

 





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