• फ्रांस के 25% लोग खतरे में, ये किसी बीमारी से जूझ रहे या फिर मोटापे से ग्रस्त हैं
  • अमेरिका में करीब 42.4% और ब्रिटेन में 29 फीसदी वयस्क मोटे

दैनिक भास्कर

Apr 10, 2020, 10:24 AM IST

नई दिल्ली. फ्रांस के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ ने कहा है कि कोरोनावायरस से संक्रमित मोटे लोगों को ज्यादा खतरा है। फ्रांस के साइंटिफिक काउंसिल के चीफ प्रोफेसर जीन फ्रैंकोइस सरकार को कोरोना से लड़ने में सलाह भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि फ्रांस के करीब 25% लोग खतरे में हैं। ये सभी लोग या तो किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या फिर मोटापे से ग्रस्त हैं, ये दोनों ही बातें कोरोनावायरस के संक्रमण के लिहाज से खतरनाक है।

मोटे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत
फ्रैंकोइस ने स्टडी के आधार पर कहा है कि ये युवा लोगों को भी शिकार बना सकता है, खासकर वे मोटे हैं तो उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। उनके मुताबिक अमेरिका और ब्रिटेन को यह खतरा ज्यादा है। अमेरिका में करीब 42.4% वयस्क मोटे हैं। जबकि 18.5% बच्चे मोटापे इस समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं ब्रिटेन में 29% वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। ये दोनों ही देश फिलहाल कोरोना के केंद्र बने हुए हैं। फ्रैंकोइस के मुताबिक अमेरिका में मोटापा एक बड़ी समस्या है। वहां सेहत से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं मोटापे के कारण ही हैं। 

फ्लू के मरीजों में भी मोटे लोगों की संख्या अधिक थी
एक रिपोर्ट के मुताबिक 1918 में अमेरिका में फैले स्पेनिश फ्लू के वक्त भी यही हुआ था। इसके अलावा 2009 में फैले एच1एन1 फ्लू की महामारी के एक वक्त हुई स्टडी में पता चला कि फ्लू की चपेट में आकर हॉस्पिटल में भर्ती होने वालों में मोटे लोगों की संख्या आम लोगों से दोगुनी थी।

बीएमआई 40 से अधिक तो संक्रमण का खतरा ज्यादा
अमेरिका में हाल ही में राज्यों द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि न्यूयॉर्क की तुलना में न्यू ऑर्लियंस और सिएटल के लोग ज्यादा कोरोना से संक्रमित पाए गए। हेल्थ अफसरों का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां के ज्यादातर लोग मोटे हैं। सीडीसी का कहना है कि जिन व्यक्तियों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 40 से अधिक है, उनमें संक्रमण का ज्यादा खतरा है।

गर्भवती महिलाओं को चेतावनी
चीन के डॉक्टर्स ने गर्भवती महिलाओं को चेतावनी दी है कि वे सावधानी रखें, गर्भ में पल रहा शिशु भी कोरोना की चपेट में आ सकता है। डॉक्टर्स ने हाल में सिजेरियन डिलेवरी से हुए उन बच्चों पर स्टडी की, ये सभी कोरोना पॉजिटिव थे। इन्हें तत्काल मां से अलग किया गया था। संभव है गर्भनाल के जरिए इन तक संक्रमण पहुंचा हो।



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