• भारत बायोटेक इंटरनेशनल कंपनी ने लॉन्च की नई वैक्सीन, पुरानी वैक्सीन के मुकाबले इसमें डोज की मात्रा कम रखी गई
  • पहले वैक्सीन को माइनस 20 डिग्री सेल्सियस पर ही स्टोर किया जा सकता था, नई अधिक तापमान पर भी सुरक्षित रहती है

दैनिक भास्कर

Dec 03, 2019, 08:08 PM IST

हेल्थ डेस्क. भारत बायोटेक इंटरनेशनल कंपनी ने मंगलवार को रोटावायरस वैक्सीन का नया संस्करण रोटावैक-5डी लॉन्च किया। पुरानी वैक्सीन के मुकाबले में इसमें डोज की मात्रा कम रखी गई है। खासियत है कि इसे अपेक्षाकृत उच्च तापमान पर भी स्टोर किया जा सकेगा।

नई रोटावैक-5डी वैक्सीन की एक खुराक 0.5 मिलीलीटर है। इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस पर 24 महीने तक स्टोर किया जा सकेगा। 37 डिग्री सेल्सियस पर रोटावैक-5डी को साथ दिनों तक स्टोर किया जा सकेगा। इसके उलट, पहले वाले संस्करण की रोटावैक वैक्सीन में 2.5 मिलीलीटर की एक खुराक होती थी और इसे -20 डिग्री सेल्सियस पर ही स्टोर किया जा सकता था।

कीमत में 25 फीसदी बढ़ोतरी

  • कंपनी के मुताबिक रोटावैक 5 डी की कीमत पिछले वैक्सीन रोटावैक से लगभग 25% अधिक होगी। पिछली वैक्सीन रोटावैक को 2016 में भारतीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया था क्योंकि इसे 2014 में स्वीकृति मिली थी।
  • भारत बायोटेक ने यह भी कहा कि लॉन्च के बाद से रोटावैक की 100 मिलियन से अधिक खुराक की आपूर्ति की गई है। भारत में रोटावायरस के टीके के लिए कंपनी का लगभग 60-70% बाजार में निवेश है। भारत बायोटेक रोटावैक के कॉम्पिटीटर ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के रोटारिक्स, मर्क के रोटेटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के रोटासिल हैं।
  • कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने कहा- ‘भारत बायोटेक वैक्सीन का नया संस्करण, रोटावैक 5 डी भारतीय टीकाकरण योजना का हिस्सा नहीं होगा क्योंकि भारत सरकार ने कहा है कि इसका -20 डिग्री सेल्सियस पर पर्याप्त स्टोरेज है और इसे अब अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर टीकों की आवश्यकता नहीं है।’

  • रोटावायरस ऐसा वायरस है जिसकी वजह से आंतों का इंफेक्शन (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) होता है। इस इंफेक्शन से आंत की अंदरुनी परत को नुकसान पहुंचता है। शरीर भोजन से केवल थोड़े से या फिर कोई पोषक तत्व अवशोषित नहीं कर पाता।
  • छह महीने से दो साल तक के बच्चों को इसका खतरा सबसे अधिक होता है। अध्ययन में पाया गया है कि पांच साल का होने से पहले तकरीबन हर बच्चे को यह इंफेक्शन होता है।
  • रोटावायरस तीव्र संक्रामक बीमारी है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सामान्य संपर्क से भी आसानी से फैल जाती है। इसका वायरस मल में मौजूद होता है और हाथों के मुंह से संपर्क से और दूषित पानी या चीजों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी फैल सकता है।

रोटायरस इनफेक्शन के संपर्क में आने के करीब 18 से 36 घंटों के भीतर आपके शिशु में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके आम लक्षणों में शामिल हैं:

  • बुखार
  • मिचली और उल्टी
  • हल्के से लेकर गंभीर दस्त (डायरिया), जो कि तीन से सात दिन तक बने रहें
  • पेट में मरोड़
  • खांसी
  • नाक बहना
     



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