नई दिल्ली: देशभर में कोरोना का कहर जारी है. ऐसे समय में गरीब लोगों को 2 वक्त की रोटी मिल जाए, ये एक बड़ी चुनौती है. मोदी रसोई लगातार इस चुनौती को स्वीकार कर रही है. लॉकडाउन के पहले दिन इस रसोई से 15000 लोगों को खाना देने से शुरुआत की गई थी, अब 45000 लोग इस रसोई से खाना खा रहे हैं. 

चप्पलों की कतार सोशल डिस्टेंसिंग भी बना रही है और अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों की पहचान भी बता रही है. भगवान के घर देर है अंधेर नहीं, यह कहावत यहां चरितार्थ हो रही है. भगवान के दरवाजे पर बैठे लोगों को खाना तो मिल जाता है लेकिन कई बार घंटों के इंतजार के बाद बारी आ रही है. किसी की फुटपाथ पर चाय की दुकान हुआ करती थी. कोई गेट के बाहर सिलाई मशीन लगाकर काम कर रहा था. तो कोई मजदूरी करके पेट पालता था लेकिन अभी सबके काम ठप पड़े हैं. ऐसे में पेट की भूख तो शांत करनी ही है.

नोएडा में बीजेपी कार्यकर्ताओं की तरफ से चलाई जा रही इस रसोई से नोएडा के 40,000 लोगों तक खाना पहुंचाने का दावा किया जा रहा है.  कई गाड़ियां और बाइक रोज नोएडा के 8 जोन में निकलती हैं. जहां से फोन आता है, वहां खाना पहुंचाती हैं. खुद भी जरूरतमंदों को ढूंढा जा रहा है. 

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यह सब काम एक कॉल सेंटर के जरिए भी हो रहा है और कार्यकर्ताओं की जानकारी के जरिए भी. लाइन में लगे हुए हर व्यक्ति को खाना तो जरूर मिल जाता है, लेकिन इन लोगों की मुश्किल यह है कि अब इन्हें राशन की दरकार है. ताकि जब भूख लगे तब खाना खा सकें. 

इन गरीबों के घर में बच्चे भी हैं और बहुत से लोग भी, जो चाहते हैं कि अगर घर तक कच्चा राशन पहुंच जाए तो इनकी मुश्किल कुछ हल हो जाएगी.

नोएडा में चल रही हेल्पलाइन से बहुत ज्यादा मदद नहीं मिल पा रही लिहाजा रोज इस कतार में लगकर खाना लेने के अलावा अभी इनके पास कोई चारा नहीं है. 

 





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