रांची: कोरोना (Corona) के कहर के बीच झारखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है.  झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को झारखंड में रांची की  स्पेशल अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 7 साल की सजा और 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. अगर ये जुर्माना नहीं भरा जाता है तो 1 साल की सजा और काटनी होगी. साथ ही 22,38,40,247 करोड़ की संपति को भी जब्त करने का आदेश दिया है.  

एनोस एक्का के खिलाफ सबसे पहले झारखंड पुलिस के विजिलेंस विभाग ने 2005 के चुनाव के समय गलत जानकारी देने के आरोप में मामला दर्ज किया था. पुलिस ने ये मामला 2008 में दर्ज किया था.

एनोस एक्का ने 2005 में चुनाव लड़ा था और झारखंड सरकार में 2005 से 2009 तक ग्रामीण विकास, पंचायती राज, यातायात और बिल्डिंग कंस्ट्रकशन विभाग के मंत्री बने थे. चुनाव के दौरान दिए हलफनामें में एनोस एक्का ने अपनी संपत्ति 10,48,827 रुपए दिखाई थी लेकिन आरोप है कि मंत्री बनने के बाद एनोस एक्का ने भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों की संपत्ति बनाई. 

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झारखंड पुलिस की इस FIR पर ही ED ने 2009 में मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी, इसके बाद झारखंड की उच्च अदालत के आदेश पर 2010 में CBI ने भी आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया. 

जांच में ED ने पाया कि एनोस एक्का ने मंत्री पद पर रहते हुए करोड़ों की संपत्ति बनाई, जिसमें रांची के आसपास के इलाके में करोड़ो की जमीन खरीदी, आलीशान कीमत का एयरपोर्ट रोड पर घर बनवाया और पत्नी ने भी आदिवासियों के नाम पर करोड़ों की जमीन खरीदी. 

ED ने जो जांच की उसमें पता चला कि एनोस एक्का  ने मंत्री पद पर रहते हुए M/s Ekka Construction Company Pvt Ltd नाम की कंपनी खोली और ग्रामीण विकास मंत्रालय से रजिस्टर्ड करवाया, जिसके वो खुद मंत्री थे. इसी कंपनी की आड़ में एनोस एक्का ने मंत्री पर पर रहते हुए करीब 22 करोड़ की अवैध संपत्ति बनाई. 

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अदालत ने CoronaVirus के कारण आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जरिए एनोस एक्का , जोकि रांची की जेल में हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, को सात साल की सजा सुनाई और दो करोड़ का जुर्माना लगाया. साथ ही जुर्माना ना देने पर एक साल की सजा बढ़ाने के लिए कहा. अदालत ने फैसले में एनोस इक्का के 22 करोड़ 38 लाख 40 हजार 247 रुपये 92 पैसे जब्त करने का आदेश दिया. 





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