• मौलाना तारिक जमील ने लाइव टेलीविजन कार्यक्रम में महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की
  • मौलाना ने मीडिया पर झूठ फैलाने का आरोप भी लगाया लेकिन बाद में  इसके लिए माफी मांग ली

दैनिक भास्कर

Apr 27, 2020, 11:06 AM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के जाने माने मौलवी मौलाना तारिक जमील ने कहा है कि कोरोना के लिए महिलाएं जिम्मेदार है। उसने यह बात प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदगी में एक लाइव टेलीविजन कार्यक्रम में कही। यह कार्यक्रम कोरोना पीड़ितों के लिए फंड जुटाने के लिए किया गया था। मौलाना ने कहा कि किसने हमारी देश की इज्जत के टुकरे-टुकरे किए हैं? कौन हमारे देश की बेटियों को नाचने के लिए कह रहा है? उन्हें कौन छोटे कपड़े पहनने के लिए कह रहा है? मैं इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराऊं? मैं अल्लाह से इसलिए माफी चाहता हूं कि मैं अपने लोगों को नहीं समझा सका कि जब मुसलमानों की बेटियां गलत रास्ते पर जाती हैं, युवा अश्लिता चुनते हैं तो अल्लाह नाराज होता है। ऐसे में इस तरह की महामारियां फैलती हैं।

वहां मौजूद प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी उसे ऐसी टिप्पणी करने के बाद नहीं रोका। अब तक उससे ऐसे बयान के लिए कोई सवाल भी नहीं किया गया है। मौलाना ने यह भी कहा कि यह बीमारी लोगों की झूठ, धोखा और बेईमानी की वजह से फैली है। जमील ने इस दौरान मीडिया पर भी झूठ फैलाने का आरोप लगाया लेकिन बाद में इसके लिए माफी मांग ली। हालांकि उसने महिलाओं पर की गई टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांगी।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने फटकार लगाई
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने इस पर मौलाना को फटकार लगाई है। आयोग ने ट्वीट किया कि मौलाना जमील का हालिया बयान बेवजह महिलाओं की गरिमा को कोरोना से जोड़ता है। इस तरह सीधे ऐसी बातें कहना अस्वीकार्य है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारण हो रहे कार्यक्रम में ऐसा कहना समाज में मौजूद कुप्रथाओं को बढ़ावा देगा। मानवाधिकार आयोग के साथ ही महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने भी मौलाना के बयान की निंदा की है।

पाकिस्तान में महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव
पाकिस्तान में महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के पहले जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स के मुताबिक पाकिस्तान में 99.81% महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। इस साल मार्च में तैयार किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि लैंगिक समानता के क्षेत्र में सुधार के बावजूद आज भी दुनिया में करीब 90% लोग ऐसे हैं, जो महिलाओं के प्रति भेदभाव या पूर्वाग्रह रखते हैं। 28% लोगों ने तो पत्नी की पिटाई तक को जायज बताया था, जिनमें महिलाएं भी शामिल थी। यह इंडेक्स दुनिया की 80% आबादी वाले 75 देशों में अध्ययन के आधार पर बनाया गया था।



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