• नए वायरस एसएआरएस-सीओवी 2 जैसे हैं, इनका इंसानों की सेहत पर इतना असर हो सकता है, इस पर शोध जारी है
  • वायरसेस के नाम प्रीडिक्ट-कोव-90, प्रीडिक्ट-कोव-47 और प्रीडिक्ट-कोव-82, क्रमश: प्रीडिक्ट-कोव-92, 93 और 96 हैं

दैनिक भास्कर

Apr 16, 2020, 05:03 PM IST

वैज्ञानिकों ने 6 नए कोरोनावायरस का पता लगाया है। यह म्यांमार में पाए जाने वाली चमगादड़ों की तीन प्रजातियों में मिले हैं। यह कोरोनावायरस से मिलते-जुलते हैं। रिसर्च टीम का कहना है कि इन वायरसेस को ग्रेट एशियाटिक घरों में पाए जाने वाले चमगादड़ों में खोजा गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, वायरस की खोज साल 2016 से 2018 के बीच की गई थी, लेकिन वह वतर्मान में महाकारी का कारण बने कोरोनावायरस से मिलते हैं, हालांकि उनमें जेनेटिकली संबंध नहीं है। वायरस जानवरों से इंसानों के शरीर में कैसे पहुंचे और उसे कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस पर आगे शोध किया जा रहा है। 

स्मिथसोनियन्स ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम द्वारा कराए गए रिसर्च में शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि इस प्रयास से दुनिया में फैल रहे वायरस के प्रकार, संक्रमण क्षमता को समझने, रोकथाम के तरीके और लोगों को होने वाले खतरे से बचाने में मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं ने 11 प्रजातियों के 464 अलग-अलग प्रकार के चमगादड़ों से सैंपल इकट्ठे किए। लाइव साइंस के मुताबिक, नए 6 वायरस को प्रीडिक्ट-कोव-90, प्रीडिक्ट-कोव-47 और प्रीडिक्ट-कोव-82, प्रीडिक्ट-कोव-92, 93 और 96 नाम दिए गए हैं।

आज दुनिया भर में लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कोरोना जानवरों से ही इंसानों तक पहुंचा है।

चमगादड़ों में हजारों कोरोना वायरस मौजूद हैं 
स्टडी के सह लेखक और स्मिथसोनियन्स ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक सुजान मुरे के मुताबिक, ‘‘कई तरह के कोरोनावायरस लोगों के लिए महामारी ला सकते हैं। अभी कुछ तरह के वायरस मिले हैं। हजारों तरह के कोरोना का पता लगाया जाना अभी बचा हुआ है।’’ 

इंसानों की सेहत का जानवरों से सीधा संबंध है
स्मिथसोनियन्स ग्लोबल हेल्थ प्रोग्रामर और फॉर्मर वाइल्डलाइफ वेटरिनेरियन मार्क वालटुट्टो ने अपने अध्ययन में कहा कि कोरोनावायरस से फैली महामारी हमें बताती है कि इंसानों की सेहत का संबंध पर्यावरण और वन्यजीवन से जुड़ा है। आज दुनिया भर में लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कोरोना जानवरों से ही इंसानों तक पहुंचा है। इस अध्ययन से हमें वायरस के बारे में अधिक जानने में आसानी होगी। इसके बाद ही हम वायरस के संक्रमण को फैलने से रोक सकते हैं।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here