कोविड-19 (Covid-19) महामारी और इसे रोकने के लिए दुनियाभर के ज्यादातर देशों में किए गए लॉकडाउन (Lockdown) का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सभी लोगों पर कुछ न कुछ असर जरूर हुआ है. ऐसे में इस महामारी के समय मानसिक या बौद्धिक रूप से कमजोर बच्चे (Mentallt Weak Children), उनका परिवार और इन बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों को भी कई चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल, कोविड-19 से बचने और इसे फैलने से रोकने का सबसे बेहतर तरीका है सोशल डिस्टेंसिंग यानी दूसरों से दूरी बनाकर रखना. लेकिन मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को हर कदम पर और अपने रोज के साधारण काम करने के लिए भी मदद और थेरेपी की जरूरत होती है. इस वक्त जब लंबे समय से लॉकडाउन जारी है, इस दौरान क्लीनिक्स बंद हैं, सभी तरह की चिकित्सीय मदद और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों से जुड़ी बाकी सेवाएं भी बाधित हो रखी हैं.

कंसल्टेंट स्कूल साइकोलॉजिस्ट एडइसेंशियल की डॉ गीतिका कपूर से हमने बात की कि कैसे माता-पिता कोविड-19 महामारी के दौरान अपने मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की मदद कर सकते हैं. हम आपको उन 10 तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिसके जरिए आप जरूरतमंद बच्चों की मदद कर सकते हैं.

1.परिस्थिति को स्वीकार करेंमानसिक रूप से कमजोर बच्चे मौजूदा महामारी और इससे जुड़े संकट के समय को भी उसी दृष्टिकोण से देखते हैं जिसमें उनकी शारीरिक और भावनात्मक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती हो. लिहाजा परिवार के सदस्यों को यह समझना होगा कि ऐसे बच्चों से यह उम्मीद करना कि वे परिवार की जरूरतों को खुद से पहले प्राथमिकता दें, पूरी तरह से अवास्तविक है.

2.सभी के लिए एक जैसा रूटीन बनाएं
मौजूदा समय में बच्चे के साथ आपको अपनी रोजाना की रूटीन से समझौता करना पड़ा है. बावजूद इसके बेहद जरूरी है कि आप अपने और अपने बच्चे के लिए एक डेली रूटीन तैयार करें. विजुअल एड्स की मदद से आप अपने बच्चे और परिवार के बाकी सदस्यों के लिए नई रूटीन बना सकते हैं, ताकि आप बच्चे की जरूरत के हिसाब से त्वरित प्रतिक्रिया दे पाएं.

3.विजुअल एड यूज करें

सभी के लिए जो डेली रूटीन तैयार करना है उसे सिर्फ मौखिक रूप से बताने की बजाए एक खाली कागज पर तस्वीरों और बोल्ड लेटर्स की मदद से तैयार करें. ये तस्वीरें आपके बच्चे और परिवार के बाकी सदस्यों के लिए रिमाइंडर का काम करेंगी. आप चाहें तो इस तरीके का इस्तेमाल कर बेहद आसानी से बच्चे को महामारी, लॉकडाउन और इससे जुड़े निर्देशों के बारे में बता सकते हैं.

4.दूसरों की मदद लें
माता-पिता होने के नाते आपकी भूमिका बेहद अहम है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपको सारे काम खुद ही करने हैं. परिवार के सदस्यों में से ही कोई व्यक्ति जो अपनी इच्छा से आपकी मदद करना चाहता हो, उसकी मदद जरूर लें अपने बच्चे की देखभाल करने के मामले में.

5.समीक्षा करें
अपने बच्चे की तरफ से दिए जा रहे संकेतों को समझें कि उन्हें घर के अंदर की जाने वाली कौन सी ऐक्टिविटीज सबसे ज्यादा पसंद हैं और किससे उन्हें डर लगता है या परेशानी होती है. आपके बच्चे जिन खेलों और ऐक्टिविटीज को पसंद करते हों उन्हें बच्चे के लिए साथ खेलने के लिए कुछ समय अलग से जरूर निकालें.

6.दोस्ती करें
यह बड़ी नैचुरल सी बात है कि ज्यादातर पैरंट्स बच्चों से कोई काम करवाने के लिए या किसी गतिविधि में शामिल करने के लिए उन्हें दिशा-निर्देश देना शुरू कर देते हैं. लेकिन साथ ही में यह भी जरूरी है कि बच्चा आपको अपना दोस्त समझे. बच्चे से दोस्ती करने के लिए उनके साथ उनके ही खेल में शामिल होना जरूरी है.

7.मांग कम करें
आप अपने बच्चे से कितने तरह की मांग कर रहे हैं, इस बात को लेकर भी सतर्क रहें. उनसे कहना कि वे हैंडवॉश करें, नहाएं, पढ़ाई करें जरूरी हैं, लेकिन ये सभी आदेश हैं. अगर बच्चे को माता-पिता की तरफ से इस तरह के कई आदेश लगातार मिलते रहते हैं तो बच्चा निष्क्रिय हो सकता है या माता-पिता के संपर्क में रहने का विरोध करने लगता है.

8.लक्ष्यों को चुनें
हफ्तेभर के लिए सीखने के कुछ लक्ष्य चुनें. आप चाहें तो इन लक्ष्यों को निर्धारित करने में किसी प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं. बच्चे की क्षमता क्या है इसे लेकर वास्तविक बने रहें और दैनिक जीवन से जुड़े चीजें और कौशल को ही सबसे ज्यादा अहमियत दें.

9.बेवजह का दबाव न बनाएं
मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को कई बार अपनी पढ़ाई लिखाई से जुड़े कामों को करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लिहाजा बेहद जरूरी है कि आप बच्चे पर बेवजह का दबाव न बनाएं. बार-बार मिल रही असफलता बच्चे की प्रेरणा को कम कर सकती है. ऐसे में बच्चे की क्षमता को पहचानें या ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स की मदद लें.

10.संपर्क में बने रहें
थेरेपिस्ट, स्पेशल एजुकेशन टीचर, स्पीच और लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट, साइकोलॉजिस्ट आदि प्रोफेशनल्स की टीम के साथ संपर्क में रहें. यह टीम आपके बच्चे के स्कूल में हो सकती है या फिर आपकी कम्यूनिटी में. इन लोगों के साथ लगातार संपर्क में बने रहें, ताकि महामारी और लॉकडाउन के बावजूद आपके बच्चे की प्रगति न रुके.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, बौद्धिक अक्षमता क्या है, कारण, लक्षण, इलाज पढ़ें.

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