• अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने तैयार की वायरलेस डिवाइस
  • डिवाइस बताती है आपके सांस लेने की दर कितनी बदल रही है, इसके आधार पर भी डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं
  • डिवाइस का ट्रायल बॉस्टन में चल रहा है, शोधकर्ताओं का दावा यह हाईरिस्क बुजुर्गों के लिए फायदेमंद साबित होगी

दैनिक भास्कर

Apr 18, 2020, 11:07 AM IST

अब इंसान के चलने-फिरने और सांस लेने की गति से पता चल सकेगा कि वह कोरोनावायरस से संक्रमित है या नहीं। अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने ऐसी डिवाइस बनाई है जो कोरोना पीड़ितों का पता लगाएगी। डिवाइस पूरी तरह से वायरसलेस है। डिवाइस में लगा सेंसर इंसान के चलने-फिरने और सांसों की गति पर नजर रखते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है, ऐसे रोगी जिनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उन्हें घर में रहना ही सबसे बेहतर विकल्प है। ऐसे में इस डिवाइस के जरिए अलर्ट रह सकते हैं। 

4 बड़ी बातें : ऐसे काम करती है डिवाइस

  • डिवाइस को नाम दिया एमरॉल्ड : शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस डिवाइस को एमरॉल्ड नाम दिया गया है और इसे घर पर रखा जा सकता है। डिवाइस दीवार पर लगाकर वाईफाई से कनेक्ट करके अलर्ट रह सकते हैं। यह डिवाइस कोरोना पीड़ितों के अलावा सामान्य लोगों के लिए भी है जो संक्रमण से बचने के लिए सावधान रहना चाहते हैं।
  • वायरलेस सिग्नल नजर रखते हैं : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह डिवाइस इंसानों की जरूरी शारीरिक एक्टिविटी पर नजर रखती है। डिवाइस से निकलने वाले वायरलेस सिग्नल इंसान के मूवमेंट का तरीका, नींद की आदत और व्यवहार के साथ सबसे अहम बात उनके सांस लेने की दर की जांचते हैं। 

 सांस लेने की दर को साफतौर पर देखा जा सकता है। तस्वीर साभार : एमआईटी

  • सांस लेने की दर बदले तो डॉक्टरी सलाह लें : शोधकर्ताओं का कहना है कि डिवाइस बताती है आपके सांस लेने की तरह कितनी बदल रही है, इसके आधार पर भी अलर्ट होकर डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं।
  • बुजुर्गों के खास मददगार : शोधकर्ता विलियम मैकग्रॉरी के मुताबिक, डिवाइस का ट्रायल बॉस्टन में चल रहा है। यह डिवाइस सबसे ज्यादा फायदेमंद बुजुर्गों के लिए साबित होगी, क्योंकि उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसकी मदद से मेडिकल डाटा हासिल कर सकेंगे।



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