Myupchar Updated: May 21, 2020, 11:35 AM IST
सेरोलॉजिकल टेस्ट क्या है? नए कोरोना वायरस से इसका क्या है कनेक्शन?

यह टेस्ट वायरस को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडीज की भी जांच कर सकता है जो वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है.

अब कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए वैज्ञानिक लोगों के खून की भी जांच (Blood Test) कर रहे हैं ताकि इस बात के संकेत मिल सकें कि वह व्यक्ति सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमित है या नहीं. इस टेक्नीक को सेरोलॉजिकल टेस्टिंग (Serological Testing) कहते हैं.

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    May 21, 2020, 11:35 AM IST

दुनियाभर के 50 लाख से भी ज्यादा लोग अब तक इस नए कोरोना वायरस (Coronavirus) सार्स-सीओवी-2 से होने वाली बीमारी कोविड-19 (Covid-19) से संक्रमित हो चुके हैं. इस बीमारी की पहचान करने के लिए की जाने वाली टेस्टिंग में नाक (Nose) और गले का स्वैब टेस्ट लिया जाता है. लेकिन अब कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए वैज्ञानिक लोगों के खून की भी जांच (Blood Test) कर रहे हैं ताकि इस बात के संकेत मिल सकें कि वह व्यक्ति सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमित है या नहीं. इस टेक्नीक को सेरोलॉजिकल टेस्टिंग (Serological Testing) कहते हैं.

सेरोलॉजिक टेस्ट मुख्य तौर पर ब्लड टेस्ट है जो व्यक्ति के खून में मौजूद एंटीबॉडीज की पहचान करता है. अलग-अलग बीमारियों की पहचान के लिए अलग-अलग तरह का सेरोलॉजिक टेस्ट किया जाता है. बावजूद इसके सभी तरह के सेरोलॉजिक टेस्ट में एक बात कॉमन होती है और वो ये है कि ये सभी इम्यून सिस्टम द्वारा बनाए गए प्रोटीन पर फोकस करते हैं. शरीर का यह इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बाहरी तत्वों द्वारा शरीर पर किए जा रहे आक्रमण को रोक कर आपको बीमार पड़ने से बचाता है.

सेरोलॉजिक टेस्ट क्यों किया जाता है?
शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणु या एंटिजेन के खिलाफ शरीर का इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज का निर्माण करता है. ये एंटीबॉडीज इन एंटिजेन से खुद को अटैच कर उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं. जब डॉक्टर आपके खून की जांच करते हैं तो वे आपके ब्लड सैंपल में मौजूद एंटिजेन और एंटीबॉडी के टाइप की पहचान कर इस बात का पता लगता हैं कि आपको किस तरह का इंफेक्शन हुआ है. कई बार हमारा शरीर स्वस्थ उत्तकों को भी बाहरी हमलावर समझकर गैर जरूरी एंटीबॉडी बनाने लगता है जिसे ऑटोइम्यून बीमारी कहते हैं. सेरोलॉजिक टेस्टिंग के जरिए इन एंटीबॉडीज की भी पहचान की जा सकती है.सेरोलॉजिक टेस्ट के नतीजे क्या बताते हैं?
टेस्ट के सामान्य नतीजे

हमारा शरीर एंटिजेन की प्रतिक्रिया में ही एंटीबॉडीज बनाता है. ऐसे में अगर टेस्टिंग के दौरान खून में एंटीबॉडीज नहीं हैं तो इसका मतलब है कि आपको इंफेक्शन नहीं है. वैसे नतीजे जो दिखाते हैं कि खून में एंटीबॉडीज नहीं है वे टेस्ट रिजल्ट नॉर्मल माने जाते हैं.

टेस्ट के असामान्य नतीजे
खून के सैंपल में एंटीबॉडीज का मिलना यह बताता है कि आपके इम्यून सिस्टम ने किसी एंटिजेन के खिलाफ प्रतिक्रिया दी है. यह एंटिजेन वर्तमान समय का भी हो सकता है या फिर किसी पुरानी बीमारी या बाहरी प्रोटीन से जुड़ा हुआ भी. कुछ विशेष तरह के एंटीबॉडीज की मौजूदगी का मतलब ये भी है कि आप एक या ज्यादा एंटिजेन के प्रति इम्यून हो गए हैं और भविष्य में इस एंटिजेन के हमले से आप बीमार नहीं पड़ेंगे.

कोविड-19 के लिए सेरोलॉजिक टेस्ट
नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 के लिए किया जाने वाला सेरोलॉजिकल टेस्ट ब्लड टेस्ट है जो खून में मौजूद सीरम या प्लाज्मा की पहचान करता है. इस टेस्ट में एंटीबॉडीज की पहचान की जाती है जिसे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने के लिए उत्पन्न करता है. इसलिए यह टेस्ट वायरस के प्रति की गई आपके शरीर की प्रतिक्रिया का पता लगता है खुद वायरस का नहीं. इस टेस्ट को इंफेक्शन के शुरुआत में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसे तब इस्तेमाल किया जाता है जब मरीज का शरीर एंटीबॉडी प्रतिक्रिया का निर्माण कर लेता है.

सेरोलॉजिकल टेस्ट अलग-अलग तरह के एंटीबॉडीज पर फोकस करता है. यह टेस्ट वायरस को निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडीज की भी जांच कर सकता है जो वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है. या फिर वह बांधने वाले एंटीबॉडीज की भी जांच कर सकता है, एक ऐसा एंटीबॉडी जो सार्स-सीओवी-2 की पहचान तो करता है लेकिन जरूरी नहीं कि उसके खिलाफ सुरक्षा भी प्रदान करे.

सार्स-सीओवी-2 के लिए इस वक्त कई तरह के सेरोलॉजिकल टेस्ट मौजूद हैं जिनमें से सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला टेस्ट है एलिसा. एलिसा का मतलब है एन्जाइम लिंक्ड इम्यूनोसोरबेंट एसे. यह टेस्ट एंटीबॉडी रिऐक्शन के आधार पर काम करता है. यह टेस्ट शरीर में कोविड-19 वायरस की पहचान करने के लिए नहीं है, लेकिन इसके माध्यम से संक्रमण की निगरानी करना और यह पता लगाना आसान होता है कि मरीज के शरीर ने सार्स-सीओवी-2 से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित कर ली है या नहीं.

कोविड-19 के गंभीर मामलों के इलाज के लिए संभावित प्लाज्मा डोनर्स की स्क्रीनिंग के लिए भी सेरोलॉजिक टेस्टिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, एलिसा टेस्ट क्या होता है, कैसे किया जाता है और इसके जोखिम पढ़ें.

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First published: May 21, 2020, 11:35 AM IST





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