• दवा खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी न लें, ये दवा के असर को कम करती हैं, 5 मिनट बाद तक कुछ भी न खाएं
  • होम्योपैथी एक्यूट रोगों में 5 से 30 मिनट और क्रॉनिक बीमारियों में यह 5 से 7 दिन में असर दिखाती है

दैनिक भास्कर

Apr 10, 2020, 08:38 PM IST

होम्योपैथी का सिद्धांत है रोग का कारण ढूंढकर उसका इलाज करना न कि बीमारी का कुछ समय के दबाना। इसलिए इलाज के दौरान रोगी का स्वभाव और आदतों के बारे में भी पूछा जाता है। इस पद्धति में रोग से ज्यादा रोगी की स्थिति पर गौर करते हैं। इलाज के दौरान दवा का असर तेजी से दिखे इसके लिए दवा लेने का तरीका भी खास होता है। आज होम्योपैथी के पितामह कहे जाने वाले डॉ. सैम्युअल हैनीमेन का जन्मदिन है, इसे वर्ल्ड होम्योपैथी डे के रूप में मनाया जाता है। इस साल की थीम है, ‘होम्योपैथी का दायरा बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वस्थ रखना’ जानिए इस पद्धति से जुड़े सवाल और होम्योपैथी एक्सपर्ट नमीता राजवंशी के जवाब…

#1) किस तरह की बीमारियों में यह पद्धति तेजी से काम करती है?
एक्यूट डिसीज के इलाज में यह दूसरी पद्धति के मुकाबले कम समय लेती है। क्रॉनिक बीमारियों के इलाज में यह रोग की गंभीरता और रोग कितना पुराना है इस पर निर्भर करता है। सिर्फ एक्सीडेंट और एक्यूट इमरजेंसी के मामले में एलोपैथी का सहारा लिया जाता है। 

#2) दवा लेने का सही तरीका क्या है और क्या परहेज करें? 
दवा खाने से पहले : मुंह साफ हो, किसी भी प्रकार का खाद्य पदार्थ मुंह में न हो। कुछ भी खाने के 5 मिनट बाद ही दवा लें। ध्यान रखें कि यदि कोई गंध वाली चीज जैसे इलायची, लहसुन, प्याज या पिपरमिंट खाई है तो 30 मिनट के बाद ही दवा लें। इस दौरान कॉफी न पीएं। ये दवा के असर को कम करती है। इसे निगलने व चबाने की बजाय चूसकर ही खाएं क्योंकि दवा का असर जीभ के जरिए होता है। 

दवा खाने के बाद : 5 मिनट तक कुछ न खाएं। 

#3) दवा हाथ में रखकर न खाने की सलाह दी जाती है, ऐसा क्यों? 

दवा के हाथ में आते ही उसमें मौजूद अल्कोहल वाष्पीकृत होने के कारण असर कम हो जाता है। इसलिए दवा को ढक्कन या कागज पर रखकर खाने को कहा जाता है। ध्यान रखें कि दवा लेने से पहले हाथ को साबुन से धोएं और हाथ सूखने के बाद ही डोज लें।

#4) यह पद्धति रोग को खत्म करने से पहले एक बार उभारती है ? 
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जिस रास्ते आप बीमारी से होकर गुजरते हैं उसे खत्म करने के लिए वापस उसकी रास्ते पर चलना पड़ता है। लेकिन इसमें घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है।

#5) होम्योपैथी मर्ज को जड़ से खत्म करती है, यह कितना सच है?
यह पद्धति बीमारी को जड़ से खत्म करती है लेकिन मरीज को इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे इलाज को बीच में न छोड़ें, अन्य चिकित्सा पद्धति को इस दौरान न शुरू करें और यदि करनी भी पड़े तो विशेषज्ञ से पूछकर ही करें, खानपान और दिनचर्या में डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। 

#6) इसमें फॉलोअप कितना जरूरी?
बीमारी का इलाज किस हद तक हुआ है, यह चिकित्सक ही तय करता है। मरीज को थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में बुलाकर उसकी स्थिति और रोग की गंभीरता देखी जाती है। कई बार मरीज बीमारी का इलाज बंद कर देता है जो कि गलत है, ऐसे में समस्या के दोबारा होने की आशंका बनी रहती है। 

#7) होम्योपैथिक दवा कितनी देर में असर करती हैं ? 
यह निर्भर करता है कि मरीज का रोग एक्यूट है या क्रॉनिक। एक्यूट रोगों में यह 5 से 30 मिनट और क्रॉनिक बीमारियों में यह 5 से 7 दिन में असर दिखाना शुरू करती है। 

#8) तय मात्रा से कम या ज्यादा दवा लेने से क्या प्रभाव पड़ता है? 
जो काम 2 गोली करती है वही चार गोलियां करेंगी। इसलिए ज्यादा या कम दवा लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता। दवा की एक डोज भी काफी होती है। 

#9) ये दवाएं मीठी क्यों होती हैं?
होम्योपैथिक औषधियां अल्कोहल में तैयार की जाती हैं जो काफी कड़वा होता है। कुछ अल्कोहल काफी कड़वे होते हैं जिससे मुंह में छाले पडऩे की आशंका रहती है। इसलिए इसे सफेद मीठी गोलियों में डालकर देते हैं। 

#10) दो मरीजों को एक जैसा मर्ज होने के बाद भी दोनों के इलाज में अलग-अलग समय क्यों लगता है? 
एक जैसी बीमारी में भी हर मरीज अलग-अलग तरह से रिएक्ट करता है। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक संरचना, उसका खानपान, लाइफस्टाइल, आदतें और दवा लेना भी महत्त्वपूर्ण फैक्टर हैं।



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